शेर-ओ-शायरी

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नाज है गुल को नजाकत पै चमन में ऐ 'जौक',
उसने देखे ही नहीं नाजो-नजाकत वाले।

-अब्राहम 'जौक'

 

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नाजुकी उसके लब की क्या कहिये
पखुंड़ी इक गुलाब की-सी है।
-मीरतकी मीर
 

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निगाहे-कहर के मारे जब इतने खुश तो फिर,
निगाहे-लुत्फ के मारों का हाल क्या होगा?
-अब्राहम जौक


1. निगाहे-कहर- कोपदृष्टि 2.निगाहे-लुत्फ - कृपादृष्टि

 

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निगाहे-मस्त से मुझको पिलाये जा साकी,
हसीं निगाह भी जामे-शराब होती है।

-सामर अजमेरी
 

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