शेर-ओ-शायरी

<< Previous  हुस्न  (Beauty)   Next>>

फिर न कीजे मेरी गुस्ताख निगाहों का गिला,
देखिये अपने फिर प्यार से देखा मुझको।
-'साहिर' लुधियानवी

 

*****

 

फैला है हुस्ने-आरिजे-रौशन नकाब में,
क्या-क्या तड़प रही है तजल्ली हिजाब में।

-साकिब लखनवी


1.हुस्ने-आरिजे-रौशन - उज्जवल गाल का सौन्दर्य 2. नकाब - घूँघट, मुखावरण, मुखपट, बुर्का 3.तजल्ली - प्रकाश, आभा, नूर


*****

बज्म में बर्के – नजर है सद - तमन्ना आफ्रीं,
दिल में है महफिल कोई या दिल मेरा महफिल मैं है।


1.बज्म- महफिल 2. बर्के–नजर -बिजली गिराने वाली नजर

3. सद - शत, एक सौ 4.आफ्रीं -धन्यवाद, शाबाश, साधु-साधु

*****

बताइए रहेगी शम्अ किस तरह हिजाब में,
यह क्या समझ के हुस्न को छुपाया है निकाब में।

-'साकिब' लखनवी


1. हिजाब -(i)आड़, पर्दा, ओट (ii) लज्जा , लाज, शर्म

2. निकाब -मुखावरण, मुखपट, बुर्का, घूँघट, ओट, आड़

 

*****
 

<< Previous  page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-46-47-48-49-50-51-52-53-54-55-56-57-58-59-60-61-62-63-64-65-66-67-68-69-70-71-72-73-74      Next >>