शेर-ओ-शायरी

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बलखा रहे है चेहरे पर गैसू-ए-पुरशिकन,
मारे - सियाह खेल रहे हैं चराग से।

1. गैसू-ए-पुरशिकन - बल पड़े हुए बाल, बलखाए हुए बाल

2. मारे–सियाह - काले साँप


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बला है कहर है आफत है फित्ना है कयामत है,
हसीनों की जवानी को, जवानी कौन कहता है।
-'अर्श' मल्सियानी


1.बला - मुसीबत, विपत्ति, आस्मानी मुसीबत


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बस इक लतीफ तबस्सुम बस इक हसीन नजर,
मरीजे-गम की हालत संभल तो सकती है

1.लतीफ - (i) कोमल, नर्म, मृदुल, नाजुक (ii) पवित्र, पाकसाफ

2.तबस्सुम - मुस्कान, मुस्कुराहट, स्मित

 

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बसा फूलों की नकहत में लिये मस्ती शराबों की,
महकता, लहलहाता एक काफिर का शबाब आया।

-असर लखनवी


1.नकहत - खुशबू, सुगन्ध, महक 2. काफिर -बेवफा प्रेमिका

3.शबाब - जवानी, युवावस्था, तारूण्य
 

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