शेर-ओ-शायरी

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बिजलियों ने सीख ली उनके तबस्सुम की अदा,
रंग जुल्फों की चुरा लाई, घट बरसात की।


1.तबस्सुम - मुस्कान


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बैठे हुए देते हैं वह दामन से हवाएँ
अल्लाह करे, हम न कभी होश में आयें
बेखुद यूँ ही रखेंगी हमें शोख अदायें
जब सामने हों आप तो क्या होश में आयें।

-नूह नारवी
 

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मय में वह बात कहाँ जो तेरे दीदार में है,
जो गिरा फिर न उसे कभी संभलते देखा।

-मीरतकी 'मीर'


1.मय - शराब

 

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मस्त आंखों पर घनी पलकों की छाया यूँ थी,
कि हो मैखाने पर घरघोर घटा छाई हुई।
-'असर' लखनवी


1.मैखाना - शराबखाना

 

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