शेर-ओ-शायरी

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मस्ती निगाहे-नाज की कैफे-शबाब में,
जैसे कोई शराब मिला दे शराब में।
-'सब्र' मख्दूमपुरी


1.निगाहे-नाज - नाजो-अंदाज की दृष्टि

2.कैफे-शबाब - जवानी या यौवन का नशा या सुरूर
 

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मिलने का वादा उनके मुंह से निकल गया,
पूछा जगह जो मैंने, कहा हंस के ख्वाब में।

-अमीर मीनाई
 

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'मीर' इन नीमबाज आंखों में सारी मस्ती शराब की-सी है,
खिलना कम-कम कली ने सीखा है तेरी आंखों की नीमबाजी से।

-मीरतकी मीर


1. नीमबाज - अधखुली, आधी खुली हुई आँख, नशीली आँख

2.नीमबाजी - अधखुलापन

 

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मुझको यह आरजू है वह उठाएं नकाब खुद,
उनकी यह इल्तिजा तकाजा करे कोई।
-मजाज


1.नकाब - घूँघट, मुखावरण, मुखपट 2.इल्तिजा - प्रार्थना, दरखास्त 3.तकाजा - माँग, फर्माइश


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