शेर-ओ-शायरी

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मुखातिब हैं साकी की मख्मूर नजरें,
मेरे जर्फ का इम्तिहाँ हो रहा है।


1.मुखातिब - बोलने वाला, बात करने वाला 2.मख्मूर - नशीली, मदभरी, नशे में चूर 3.जर्फ - सहन-शक्ति, सहनशीलता, सब्र, धैर्य


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मुझसे इर्शाद यह होता है तड़पा न करे कोई,
कुछ तुम्हें अपनी अदाओं पर नजर है कि नहीं?
-'जलील' मानिकपुरी


1.इर्शाद - माँग, हुक्म

 

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मुझी को सब कहते हैं रख नीची नजर अपनी,
कोई उनको नहीं कहता, न निकलो यूँ अयाँ होकर।

-अकबर इलाहाबादी


1.अयाँ - प्रकट, जाहिर, दृष्टिगोचर
 

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मुझे मैखाना थर्राता हुआ नजर आता है,
वह मेरे सामने शर्मा के जब पैमाना रखते हैं।

-'अख्तर' शीरानी


1.मैखाना - शराबखाना 2.पैमाना - शराब पीने का पियाला, पान-पात्र

 

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