शेर-ओ-शायरी

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मुझे जिस दम खयाले-नर्गिसे-मस्ताना आता है,
बड़ी मुश्किल से काबू में दिले-दीवाना आता है।
-जलील मानिकपुरी


1.खयाले-नर्गिसे-मस्ताना - मदभरी या नशीली आँखों का खयाल

 

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मुस्कराती हुई यूँ आई वह मैखाने में,
रूक गई साँस छलकते हुए पैमानों की।
-'जोश' मलीहाबादी


1.मैखाना - शराबखाना 2.पैमाना - शराब पीने का पियाला, पान-पात्र

 

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मुस्कुरा कर इक निगाह मसत सब पर डाल दो,
हम भी देखें अंजुमन में कितने अहले-होश हैं।


1.अंजुमन – महफिल 2.अहले-होश - होश वाले, होश में

 

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मैं उम्र भर 'अदम' न कोई दे सका जवाब,
वह इक नजर में, इतने सवालात कर गये।

-अब्दुल हमीद 'अदम'
 

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