शेर-ओ-शायरी

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मैंने जो तुम्हें चाहा, क्या इसमें खता मेरी,
यह तुम हो, यह आइना, इन्साफा करो।

-'जलील'मानिकपुरी

 

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मैंने पी ली तेरी निगाहों से,
लोग कैसी शराब लाये हैं।
-'बेताब' अलीपुरी
 

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मैकदे लाख बंद करें जमाने वाले,
शहर में कम नहीं आंखों से पिलाने वाले।

 

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मौजे-निकहते-गुल में जेरो-बम का है आलम,
आज सहने-गुलशन में कौन ये खरामां है।
-गोपाल मित्तल


1.मौजे-निकहते-गुल - फूल की सुगन्ध की मौज (लहर)

2.जेरो-बम - उथल-पुथल 3.आलम - स्थिति, हाल 4. सहन - आँगन, अँगनाई 5.खरामां - मंदगति से या हल्की चाल से आना
 

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