शेर-ओ-शायरी

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यह उड़ी-उड़ी सी रंगत,ये खुले-खुले से गैसूँ,
तेरी सुबह कह रही है तेरी रात का फसाना।
-अहसन दानिश


1.गैसूँ - बाल, केश

 

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यह और बात है कि मैं शिकवा न कर सकूँ,
लेकिन तेरी निगाह को पहचानता हूँ मैं।
-'नाजिश' प्रतापगढ़ी
 

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यह किसका ढल गया है आंचल, तारों की निगाह झुक गई है,
यह किसकी मचल गई है जुल्फें, जाती हुई रात रूक गई है।

-जांनिसार अख्तर
 

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यह गैसुओं की घटाएं,यह लबों के मैखाने,
निगाहे-शौक खुदाया कहाँ - कहाँ ठहरे।

-आले अहमद सरूर


1. गैसू - बाल, केश 2.लब - होंठ 3.मैखाना, - शराबखाना, मदिरालय

4. निगाहे-शौक - चाहत की निगाह 5. खुदाया - हे ईश्वर, हे खुदा

 

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