शेर-ओ-शायरी

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यह दिलबरी,यह नाज, यह अंदाज, यह जमाल,
इन्सां करे अगर न तेरी चाह तो क्या करे।
-अख्तर शीरानी


1.दिलबरी - दिल उड़ा ले जाने वाली सुन्दरता या अदा

 

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यह न जाना था कि उस महफिल में दिल रह जायेगा,
हम ये समझे थे चले आयेंगे दमभर देखकर।
-ममनून

 

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यह बात, यह तबस्सुम, यह नाज, यह निगाहें,
आखिर तुम्हीं बताओं क्यों कर न तुमको चाहें

-'जोश' मलीहाबादी


1.तबस्सुम - मुस्कान, मुस्कुराहट, मंदहास, स्मित
 

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यह मस्तियों का रंग है जोशे-शबाब में,
गोया कि वह नहाए हुए है शराब में।

-अनवर मिर्जापुरी


1.जोशे-शबाब-जवानी के जोश में, जवानी के जोर या युवावस्था के उमंग में

 

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