शेर-ओ-शायरी

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यह मुस्कुराती हुई आंखें जिनमें रक्स करती है बहार,
शफक की, गुल की, बिजलियों की शोखियाँ लिये हुए।

-'फिराक' गोरखपुरी


1.रक्स - नृत्य

2.शफक - ऊषा, सबेरे या शाम की लालिमा जो छितिज पर दिखाई देती है
 

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यह शर्मगीं निगाह,यह तबस्सुम निकाब में,
क्या बेहिजबियाँ हैं तुम्हारे हिजाब में।
-जकी


1.शर्मगीं - शर्म से झुकी हुई 2.तबस्सुम - मुस्कान, मुस्कराहट, स्मित, मंदहास 3.निकाब - (i) घूँघट, मुखावरण, मुखपट (ii) ओट, आड़ 4.बेहिजबियाँ - घूँघट हटा देना 5. हिजाब - आड़, पर्दा, ओट

 

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यह सताने की निकाली है अनोखी तरकीब,
जुल्म का नाम सितमगर ने हया रखा है।
-मुहम्मद अली जौहर


1.हया - लज्जा, शर्म

 

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यह सुनकर मैंखाने में मैंने अपना नाम लिखवाया,
जो मैकश लड़खड़ाता है, वह बाजू थाम लेते हैं।

-'जोश' मलीहाबादी


1.मैंखाना – शराबखाना 2.मैकश - शराबी

 

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