शेर-ओ-शायरी

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यह साकी ने सागर में क्या चीज दे दी,
कि तौबा हुई पानी - पानी हमारी।

-रियाज खैराबादी


1.सागर - शराब पीने का पियाला, पान-पात्र

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यहाँ के हुस्नवालों में बला की दिलनवाजी है,
कि जालिम रूठकर भी मेहरबाँ मालूम होते हैं।


1.बला - बहुत अधिक, मुसीबत ढाने वाली 2.दिलनवाजी - (i) दोस्ती, मैत्री (ii) सान्त्वना, ढाढस ,दिल को तसल्ली देना

 

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याद आती है जब तेरे तबस्सुम की हमें,
दिल में देर तक चरागों का समाँ रहता है।

-नरेश कुमार 'शाद'


1. तबस्सुम - मुस्कान, मुस्कुराहट, स्मित मंदहास

2. समाँ - मंजर, नजारा, दृश्य

 

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यूँ मुस्कुराये जान-सी कलियों में पड़ गई,
यूँ लबकुशा हुए कि गुलिस्ताँ बना दिया।
-'असगर' गौण्डवी


1.लबकुशा - बात करता हुआ, बात करने वाला, मुंह खोलना

 

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