शेर-ओ-शायरी

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इजाजत हो तो मैं तस्दीक कर लूँ तेरी जुल्फों से,
सुना है जिन्दगी इक खूबसूरत दाम है साकी।

-अब्दुल हमीद 'अदम'

1. तस्दीक - प्रमाणित 2. दाम - जाल, फंदा, पाश

 

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इधर गैसू, उधर रू-ए-मुनव्वर है तसव्वर में,
कहाँ ये शाम आयेगी, कहाँ ऐसी सहर होगी।


1.गैसू - बाल, जुल्फें 2. रू-ए-मुनव्वर - रौशन चेहरा या मुखड़ा

3. सहर - सुबह, प्रातःकाल, प्रभात, भोर

 

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इरशाद हो तो मैं इसे आँखों पै फेर लूँ,
भीगा हुआ है आप का दामन शराब में।

-अब्दुल हमीद अदम

1.इरशाद - आज्ञा, इजाजत

 

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इलाही कैसी - कैसी सूरतें तूने बनाई है,
कि हर सूरत कलेजे से लगा लेने के काबिल है।

-अकबर इलाहाबादी

 

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