शेर-ओ-शायरी

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रूखे-रौशन के आगे शम्अ रखकर वो ये कहते है,
उधर जाता है देखें या इधर परवाना आता है।
-मिर्जा 'दाग'


1.रूखे-रौशन - रौशन चेहरा 2.परवाना - (i) पतंगा, शलभ (ii) आदेश-पत्र, हुक्मनामा (iii) भक्त, फिदाई (iv) आसक्त, फरेफ्ता

 

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लाखों लगाव, एक चुराना निगाह का,
लाखों बनाव, एक बिगड़ना इताब में।
-मिर्जा 'गालिब'


1.इताब - कोप, क्रोध, गुस्सा

 

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लिल्लाह! यह तुम देखने वालों से न पूछो,
कि क्या चीज हो तुम देखने वालों की नजर में।

-अफसर मेरठी


1. लिल्लाह - ईश्वर के लिए, ईश्वर के नाम पर
 

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लूटने वाले मेरी नींद को,
किस मजे से रात भर सोया किए।

-साकिब लखनवी

 

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