शेर-ओ-शायरी

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वस्ल की शब कौन देखेगा उन्हें,
हर अदा पर हम तो मर मर जायेंगे।
-'अब्र' जोधपुरी


1.वस्ल - मिलन, प्रेमी और प्रेमिका का संयोग

2.शब - रात, निशा, रजनी, यामिनी, रात्रि
 

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वह आड़ में पर्दे के तेरी नीमनिगाही
टूटे हुए तीर का इक टुकड़ा है जिगर में।
-'निहाल' सेहरारवी


1.नीमनिगाही - कनखियों से देखना

 

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वह नजर उठ गई जब सरे-मैकदा,
खुब-ब-खुद जाम से जाम टकरा गये।

-'इकबाल' शफीपुरी


1.सरे-मैकदा - भरे शराबखाने में
 

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वह बेनकाब कहीं बेनकाब होता है,
कि आफताब खुद अपना हिजाब होता है।

-'नातिक' लखनवी


1.आफताब - सूरज, सूर्य 2.हिजाब - (i) आड़, पर्दा, ओट (ii) लाज, शर्म

 

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