शेर-ओ-शायरी

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वह जुल्फें दोश पै बिखरी हुई हैं ,
जहाने - आरजू थर्रा, रहा है।
-जिगर मुरादाबादी


1.दोश - कंधा

 

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वह तोड़ते हैं तो कलियाँ शिगुफ्ता होती हैं ,
वह रौंदते हैं तो सब्जा निहाल होता है।
-अकबर इलाहाबादी


1.शिगुफ्ता - खिलना 2.सब्जा - हरी घास, हरियाली

3. निहाल - प्रफुल्ल, प्रसन्न, खुश

 

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वह दौलत जिसका दुनिया ने मसर्रत नाम रखा है,
तेरे जलवों के दामाने-नजर में भीक होती है।

-'अफसर' मेरठी


1.मसर्रत - आनन्द, खुशी 2.दामाने-नजर - नजर के आँचल में

 

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वह मस्तियों का रंग है जोशे-शबाब में,
गोया कि वह नहाए हुए है शराब में।

-अनवर मिर्जापुरी


1.जोशे-शबाब - जवानी का उफान या उबाल, जवानी का उमंग या उत्साह

 

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