शेर-ओ-शायरी

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वो अपनी खू न छोडेंगे, हम अपनी वज्अ क्यों बदलें,
सुबकसर बन के क्या पूछें कि हम से सरगराँ क्यूँ हो।
-मिर्जा 'गालिब'
1.खू - आदत, स्वभाव 2.वज्अ - अन्दाज, शैली 3. सुबकसर - सर झुकाकर, सर नीचा करके 4.सरगराँ - नाराज, अप्रसन्न, रूष्ठ, नाखुश, खफा
 

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शबनम हो, कहकशाँ हो, सितारे हों, फूल हों,
जो शै तुम्हारे सामने आई, निखर गई।
-'बाकी' सिद्दकी


1.शबनम - ओस, आकाश जल 2. कहकशाँ - आकाशगंगा

 

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शबाब मैकश, खयाल मैकश, जमाल मैकश, निगाह मैकश,
खबर वो रखेंगे क्या किसी की, उन्हें खुद अपनी खबर नहीं है।

-जिगर मुरादाबादी


1.शबाब - युवावस्था, जवानी 2.मैकश - शराबी

3. जमाल - (i) सुन्दरता, सौन्दर्य (ii) मुखकांति, मुखाभा
 

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शर्मा के यूँ न देखिये लिल्लाह बार-बार,
ऐसा न हो कि प्यार के चश्मे उमड़ पड़ें

-'साहिर' भोपाली


1. लिल्लाह - ईश्वर के लिए, ईश्वर के नाम पर

 

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