शेर-ओ-शायरी

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शिकन न डाल जबीं पर शराब देते हुए,
यह मुसकुराती हुई चीज मुसकुराके पिला।
सरूर चीज के मिकदार पै नहीं है मौकूफ,
शराब कम है साकी तो नजर मिला के पिला।


1.शिकन - सिलवट, सिकुड़न, बल 2.जबीं - माथा, भाल, ललाट 3. सरूर - नशा, हलका नशा 4.मिकदार - मात्रा, वजन, तोल 5.मौकूफ- निर्भर, आधारित
 

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शिकायत जुल्मे-खजंर का नहीं गम है तो इतना है,
जबाने-गैर से क्यों मौत का पैगाम, आया है?

-'साकिब' लखनवी
 

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हुस्न से वह गाफिल था, मैं अपने इश्क से,
अब कहाँ से लाऊँ वह नावाकाफियत के मजे।

-हसरत मोहानी


1.गाफिल - असावधान, बेखबर 2.नावाकाफियत - अनभिज्ञता,अनजानापन
 

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है जवानी खुद जवानी का सिंगार,
सादगी गहना है इस सिन के लिये।

-अमीर मीनाई


1.सिन - आयु, उम्र
 

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