शेर-ओ-शायरी

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समझ के करते है बाजार में वह पुरशिसे-हाल,
कि यह कहै कि सरे-रहगुजर है क्या कहिए।

-मिर्जा गालिब


1. पुरशिसे-हाल - हालत की पूछताछ 2. सरे-रहगुजर - रास्ते में

 

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सवाल उनका,जवाब उनका, सुकूत उनका, इताब उनका,
हम उनकी अंजुमन में सर न खम करते तो क्या करते।
-मजरूह सुल्तानपुरी


1.सुकूत - खामोशी, चुप्पी 2. इताब - गुस्सा, क्रोध, कोप

3.अंजुमन - महफिल 4.खम - (i) झुकाव (ii) वक्रता, टेड़ापन
 

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साकी तेरे निगाह की क्या सियाहकारियाँ है,
मैख्वार होश में है, जाहिद बहक रहा है।
-महेश चन्द नक्श
 

1.सियाहकारियाँ - पाप कर्म, गुनाह 2.मैख्वार - शराबी 3. जाहिद - संयमी, विषय-विरक्त, संयम, नियम और जप-तप करने वाला व्यक्ति
 

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सुना था तेरी महफिल में सुकूने-दिल भी मिलता है,
मगर हम जब भी तेरी महफिल से आये, बेकरार आये।

 

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