शेर-ओ-शायरी

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सुना है फिर वह आ रहे हैं, सुनने दास्तां मेरी,
इलाही आज तो रंगे-असर लाये, जुबाँ मेरी।

-'अलम' मुजफ्फरनगरी


1.इलाही - हे ईश्वर

 

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सुबह दम जुल्फें न यूँ बिखराइये,
लोग धोखा खा रहे हैं, शाम का।

-'शरर' बलियावी
 

1. सुबह दम - सुबह-सुबह

 

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सौ तीर जमाने का इक तीरे - नजर तेरा,
अब क्या कोई समझेगा, दिल किसका निशाना है?

 

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सौ-सौ उम्मीदें बंधती है, इक-इक निगाह पर,
मुझको न ऐसे प्यार से देखा करे कोई।
-इकबाल
 

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