शेर-ओ-शायरी

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हट गई नजरों से नजरें मैकदा-सा लुट गया,
मिल गई नजरों से नजरें, मैकशी होने लगी।
-कलीम वरनी


1.मैकदा - खराबखाना, मैखाना 2.मैकशी - शराब पीना

 

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हम कैफे-नजर के आलम में, सरशारे-जमाले -मस्ती थे,
जब सामने जामे-मय आया, हम जाम उठाना भूल गये।

-'जेब' बरेलवी


1. कैफे-नजर - आँखों की मस्ती, ऑखों का नशीलापन 2. आलम - स्थिति, हाल, दशा 3.सरशारे-जमाले –मस्ती - सौन्दर्य के नशे में मदहोश 4.जामे-मय - शराब से भरा हुआ पियाला

 

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हमारी जान सदके नौजवाँ कातिल के गुस्से पर,
कोई अन्दाज देखे आस्तीनों के चढ़ाने का।

-'शाद' अजीमाबादी


1. सदका - न्यौछावर

 

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हया बेहोश होकर गिर रही है,
किसी की बेहिजाबी तौबा-तौबा।
-अब्दुल हमीद 'अदम'


1.हया - लज्जा, शर्म, व्रीड़ा 2.बेहिजाबी - घूँघट उठाना 3. तौबा-तौबा - किसी बुरे काम से बाज रहने की दृढ़ प्रतिज्ञा

 

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