शेर-ओ-शायरी

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हुस्न से वह गाफिल था, मैं अपने इश्क से,
अब कहाँ से लाऊँ वह नावाकाफियत के मजे।

-हसरत मोहानी


1.गाफिल - असावधान, बेखबर 2.नावाकाफियत - अनभिज्ञता,अनजानापन
 

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है जवानी खुद जवानी का सिंगार,
सादगी गहना है इस सिन के लिये।

-अमीर मीनाई


1.सिन - आयु, उम्र
 

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है देखने वालों को संभलने का इशारा,
थोड़ी-सी नकाब वह सरकाये हुए हैं।

-अर्श मल्सियानी


1. नकाब - घूँघट, मुखावरण, पर्दा, बुर्का

 

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है हुस्न भी इक आफत बागे-जहाँ में ऐ दिल,
किस-किस से तू बचेगा, गुलचीं है बागबाँ है।
-आनन्द नारायण मुल्ला


1.बागे-जहाँ - संसार रूपी गुलशन 2.गुलचीं - फूल चुनने वाला, माली, मालाकार 3.बागबाँ - उद्यानपाल, बाग की रखरखाव करने वाला, माली


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