शेर-ओ-शायरी

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हैराँ हुए न थे जो तसव्वर में भी कभी,
तस्वीर हो गये तेरी तस्वीर देखकर।
-'फिराक' गोरखपुरी


1.तसव्वर - कल्पना, विचार, खयाल, तखैयुल

 

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होश जाता नहीं रहा लेकिन,
जब वह आता है तब नहीं आता।

 

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हर शै में रौशनी है, तुम्हारे जमाल की,
मेरा न हो यकीं तो बहारों से पूछ लो।
-'अलम' बस्तवी


1.शै - चीज, वस्तु, पदार्थ 2.जमाल - (i) सौन्दर्य, सुन्दरता, रूप, हुस्न (ii) शोभा, छटा, छवि (iii) मुखकांति, मुखाभा

 

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हरदम नजर को ही न थी जल्वों की आरजू,
जल्वों ने भी नजर को पुकारा कभी-कभी।


1. जल्वा - अपने को बनाव-सिंगार करके दिखाना, सुन्दर या खूबसूरत व्यक्ति या चीजें

 

 

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