शेर-ओ-शायरी

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उनकी ही बज्म सही पै कहाँ का है दस्तूर,
इधर को देखना, देना उधर को पैमाने।

-अमन लखनवी


1.बज्म - महफिल

 

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उनके रूखसार पै बहते हुए आंसू तौबा,
हमने शोलों पै मचलती हुई शबनम देखी।


1. रूखसार - गाल, कपोल 2.शबनम - ओस, आकाश-जल
 

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उनको गरूरे-हुस्न है मुझको सरूरे-इश्क,
वह भी नशे में चूर हैं, मैं भी पिये हुए हूँ।


1. सरूर - (i) हल्का नशा (ii) खुशी, आनन्द, लज्जत

 

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उनको सोते हुए देखा था दमे-सुबह कभी,
क्या बताऊं जो इन आंखों ने समां देखा था।

-'अजीज' लखनवी


1. दमे-सुबह - सुबह के वक्त

 

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