शेर-ओ-शायरी

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आये तो यूँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबाँ,
भूले तो यूँ कि जैसे कभी आश्ना न थे।

-फैज अहमद फैज


1.आश्ना -(i) मित्र, दोस्त (ii) परिचित, जानकार, वाकिफ

 

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इन्तिहा-ए-करम वह है कि जहाँ,
बेगुनाही गुनाह बन जाये।

-दिल शाहजहांपुरी


1.इन्तिहा - (i) आखिरी हद, छोर (ii) पराकाष्ठा, चरम सीमा (iii) अत्यधिक, बहुत जियादा 2.करम - दया, कृपा, मेहरबानी

 

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खिजाँ के दौर में उस पर बहार आ जाये,
तेरी निगाह को जिस पर भी प्यार आ जाये।
जो आप की इनायत हो तो मजाल कहाँ,
मेरे करीब गमे - रोजगर आ जाये।

-नसीम मजहर


1.खिजाँ - पतझड़ की ऋतु

 

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जिन्दगी आप की ही नवाजिश है,
वरना हम मर गये होते।

-अब्दुल हमीद अदम


1.नवाजिश- कृपा, इनायत

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