शेर-ओ-शायरी

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घर से तो बहुत दूर है मंदिर का रास्ता,
आओ किसी रोते हुए चेहरे को हसाएं।

 

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'जफर' आदमी उसको न जानियेगा,
हो वो कैसा भी साहिबो-फहमो-जका।
जिसे ऐश में यादे-खुदा न रहा,
जिसे तैश में खौफे-खुदा न रहा।
-'जफर'.

1.साहिबो-फहमो-जका - बुद्धि और विवेक वाला, अत्यन्त बुद्धिमान

2. तैश - क्रोध, कोप, गुस्सा
 

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जब तक गमे-इन्साँ से 'जिगर' इन्साँ का दिल मामूर नहीं,
जन्नत ही सही दुनिया लेकिन जन्नत से जहन्नुम दूर नहीं।
-'जिगर' मुरादाबादी

1.मामूर - आबाद, भराहुआ, बसा हुआ 2. जन्नत - स्वर्ग, बहिश्त 3.जहन्नुम -
नरक, दोजख, बहुत ही कष्ट और दुख की जगह

 

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तू जिसे जर्रा समझकर कर रहा है पायमाल,
देख उस जर्रे के सीने में कहीं दुनिया न हो।
-'शफा' ग्वालियरी

1. पायमाल -
(i) पाँव तले रौं
  , पद-दलित(ii)दुर्दशाग्रस्त, मुसीबतजदा 2. जर्रा - (i) कण, बहुत ही बारीक रेज़ा (ii) अति तुच्छ, बहुत ही हकीर

 

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