शेर-ओ-शायरी

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जिस गम से तस्कीं मिलती हो, उस गम का मुदावा कौन करे,
जिस दर्द में लज्जत हो पिन्हा, उस दर्द का दरमाँ क्या होगा।

-जगन्नाथ आजाद


1.तस्कीं - (i) पीड़ा और दर्द में कमी, आराम (ii) संतोष, इत्मीनान 2.मुदावा - दवा, इलाज 3.लज्जत - आनन्द, लुत्फ 4.पिन्हा - छुपा हुआ 5.दरमाँ - उपचार, चिकित्सा, इलाज

 

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जो गमे-हबीब से दूर थे, वो खुद अपनी आग में जल गये,
जो गमे-हबीब को पा गये तो गमों से हंस के निकल गये।

-शायर लखनवी


1.गमे-हबीब – दोस्त या मित्र का ग़म

 

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जहाँ रहेगा, वहीं रौशनी लुटायेगा,
किसी चराग का कोई मकां नहीं होता।


1.मकां - (i) ठहरने का स्थान, मकान, घर (ii) मंजिल, पड़ाव

 

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जो चाहो फकीरी में इज्जत से रहना,
न रखो अमीरी से मिल्लत जियादा।
फरिश्ते से बेहतर है इन्सान बनना,
मगर इसमें पड़ती है मिहनत जियादा।

-ख्वाजा हाली

 

1.फकीरी - गरीबी 2.मिल्लत-संबंध, लगाव

 

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