शेर-ओ-शायरी

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दूसरों पैं जब तबसिरा कीजिए,
सामने आइना रख लिया कीजिए।


1. तबसिरा - आलोचना
 

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परीशाँ होने वालों को सुकूं कुछ भी मिल भी सकता है,
परीशां करने वालों की परीशानी कभी नहीं जाती।
 

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पामाल होते-होते भी खुशबू लुटा गया,
सीखा नहीं बशर ने फूलों का चलन अभी।
-असर लखनवी

1.पामाल - पैरों तले रौंदा जाना 2. बशर - मनुष्य, मानव, आदमी
 

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फरिश्ते से बेहतर है इन्सान बनना,
मगर इसमें पड़ती है मिहनत जियादा।
-ख्वाजा हाली
 

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