शेर-ओ-शायरी

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मय न दे, भीना न दे, सुरूर न दे,
जिन्दगी का चाहे शऊर न दे।
और कुछ दे या न दे लेकिन,
मेरे मौला मुझे गरूर न दे।

1.सुरूर - हल्का नशा

 

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मुहब्बत है मुझे बुलबुल के गमअंगेज नालों से,
चमन में रह के मैं फूलों का शैदा हो नहीं सकता।
-'चकबस्त' लखनवी

 

1.गमअंगेज-ग़म या दर्द बढाने वाला, व्यथा पैदा करने वाला,शोकप्रद 2.नाला-आर्तनाद, फ़रियाद, चीख,शोर  

 रोना-पीटना 3.शैदा-(i)चाहने वाला, आशिक (ii) मुग्ध,मोहित,आसक्त (iii)पागल, दीवाना 

 

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मेरा तो फर्ज चमनबंदी-ए-जहाँ है फकत,
मेरी बला से बहार आये या खिजाँ गुजरे।
-'जिगर' मुरादाबादी

1. चमनबंदी-ए-जहाँ - संसार रूपी बाग की देख-रेख

2. खिजाँ - पतझड़ की ऋतु

 

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मौत उसकी है करे जिसका जमाना अफसोस,
यूँ तो दुनिया में सभी आते है मरने के लिए।
-'महमूद' रामपुरी

 

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