शेर-ओ-शायरी

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महरूम है जो नरममिजाजी से बशर,
दरअसल वह नेकी से ही महरूम है।

1.महरूम -
वंचित 2. नरममिजाजी - मधुर और कोमल स्वर, मृदुल स्वभाव 3. बशर - मनुष्य, मानव, आदमी।

 

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मेरे गुनाहों पर करें तब्सिरा लेकिन,
सिर्फ मैं ही तो गुनहगार नहीं।

-सीमाब अकबराबादी


1.तब्सिरा - आलोचना

 

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मेरे सरकश तरानों की हकीकत है तो इतनी है,
कि मैं जब देखता हूँ भूख के मा
रे  किसानों को ।
गरीबों, मुफलिसों को, बेकसों को, बेसहारों को,
सिसकती नाजनीनों को, तड़पते नौजवानों को।
हुकूमत के तशद्दुद को, इमारत के तदब्बुर को,
किसी के चीथड़ों को और शहनशाही खजानों को
तो दिल ताबे-निशाते-बज्मे -इशरत ला नहीं सकता।

-साहिर लुधियानवी

1.सरकश - विद्रोही, बागी 2.मुफलिसों – गरीबों 3.नाजनीनों-सुन्दरियों

4. तशद्दुद - सख्ती, जुल्म, अत्याचार 5.इमारत – धनाढ्यता (यानी
मालदार लोग)
6.तदब्बुर - सोच 7. ताबे-निशाते-बज्मे -इशरत  - महफिलों में प्राप्त होने वाले सुख और ऐश को सहने की शक्ति


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मिटा दे अपनी हस्ती को गर कुछ मर्तबा चाहिए,
कि दाना खाक में मिलकर गुले-गुलजार होता है।
-मोहम्मद इकबाल

1.मर्तबा -
प्रतिष्ठा, इज्जत

 

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