शेर-ओ-शायरी

<< Previous  इंसानियत (Goodness of human nature)  Next >>

मैं अब वाकिफ हुआ हूँ, है कमाले-इश्क वो मंजिल,
जहाँ इन्सान को महसूस होती है कमी अपनी।

-'अलम' मुजफ्फरनगरी

1. कमाले-इश्क - मुहब्बत की पूर्णता

 

       *****

 

नशा पिला के गिराना तो सबको आता है,
मजा तो जब है कि गिरतों को थाम ले साकी।
-अब्दुल हमीद 'अदम'
 

*****

 

 

नूह का तूफाँ भी उसको गर्क कर सकता नहीं,
जो बराये-खल्क जीता है वह मर सकता नहीं।

1.नूह - एक पैगम्बर जिनके समय में बड़ा तूफान आया था, जिसमें सारा संसार नष्ट हो गया था, कुछ आदमी बचे थे, जिनकी संतान इस समय हैं
2. गर्क - डूब जाना 3. बराये-खल्क - जनता या अवाम के लिए


*****

 

यारब किसी से छीनकर मुझको खुशी न दे,
जो दूसरों पै बार हो, वह जिन्दगी न दे।

1.बार - बोझ, वजन


*****

 

<< Previous page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24         Next >>