शेर-ओ-शायरी

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         सिर्फ जिन्दा रहने को जिन्दगी नहीं  कहते,

         कुछ गमे-मुहब्बत हो कुछ गमे-जहाँ यारों।

-शायर हिमायत अली

 

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सदाकत खुद-ब-खुद करती है शोहरत इस जमाने में,
कभी खुशबू भी कहती है, मुझे तुम सूंघ कर
देखो


1.सदाकत - सच्चाई, सत्यता

 

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शम्अ एक मोम के पैकर के सिवा कुछ भी नहीं,
आग जब तन पै लगाई है
तो जान आई है।
-आनन्द नारायण 'मुल्ला'

1.पैकर - (i) देह, शरीर, (ii) आकृति,
शक्ल

 

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हक उसी को है मुस्कराने का,
जिसके दिल में गम है जमाने का।

नरेश कुमार 'शाद'

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हजार चाँद-सितारों का खून होता है,
तब इक सुबह फिजाओं में मुस्कुराती है।

हमने कांटों को भी नरमी से छुआ है लेकिन,
लोग बेदर्द है फूलों को मसल देते हैं।

 

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