शेर-ओ-शायरी

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हम तो बिक जाते हैं उन अहले-करम के आगे
करके एहसान भी जो नीची नजर रखते हैं।


1.अहले-करम -मेहरबानी या कृपा करने वाला
 

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हम वो पेड़ है जो छांव बाटकर अपनी,
शदीद धूप में खुद साये को तरसते हैं।


1.शदीद - तेज, तीव्र, कड़ी, प्रचण्ड

 

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हमें भी याद रखें जब लिखें तारीख गुलशन की,
कि हमने भी लुटाया है चमन में आशियाँ अपना।
-आजीज इन्दौरवी

1. तारीख - इतिहास

 

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हवा - ए - दहर बिगाड़े लाख फूलों को,
न हो वह रंग, शराफत की कुछ बू तो होगी।

-'शाद' अजीमाबादी

1.हवा- ए–दहर – (i)काल, समय, वक्त, जमाना

 

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