शेर-ओ-शायरी

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हविसे-गुल में बढ़ाया न मैंने कभी हाथ,
न किसी खार से उलझा दामन मेरा।

-त्रिलोक चन्द महरूम


1.हविस - (i) उत्कंठा, लालसा (ii) लोभ, लालच 2.गुल - फूल

 

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हुस्ने-फरोगे-शमए-सुखन दूर है 'असद',
पहले दिले-गुदाख्ता पैदा करें कोई।

-मिर्जा गालिब


1.हुस्ने-फरोगे-शमए-सुखन - शाइरी या कविता की शम्अ की रोशनी का सौन्दर्य 2.गुदाख्ता - पिघलने वाला या द्रवणशील (यानी संवेदनशील)
 

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हुस्ने-सीरत पर नजर कर हुस्ने-सूरत को न देख,
आदमी है नाम का गर खू नहीं इन्सान की।

-'आर्जू' लखनवी

1.सीरत - (i)स्वभाव, प्रकृति आदत (ii) अख्लाक, चरित्र।

 

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है जज्बे – बाहमी से कायम निजाम सारा,
पोशीदा है यह नुक्ता तारों की जिन्दगी में।
-मोहम्मद इकबाल

1.बाहमी - पारस्परिक, आपस का 2. निजाम - प्रबंध, व्यवस्था

3.पोशीदा - छुपा हुआ 4.नुक्ता - रहस्य, मर्म

 

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