शेर-ओ-शायरी

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दुश्मन भी हो तो दोस्ती से पेश आये हम,
बेगानगी से अपना नहीं आश्ना मिजाज।

-आतिश


1.बेगानगी - (i) परायापन (ii) अनजानापन, ज्ञान का न होना, बेइल्मी 2.आश्ना - परिचित, वाकिफ

 

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दूसरों पैं जब तबसिरा कीजिए,
सामने आइना रख लिया कीजिए।


1. तबसिरा - आलोचना
 

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मेरे गुनाहों पर करें तब्सिरा लेकिन,
सिर्फ मैं ही तो गुनहगार नहीं।

-सीमाब अकबराबादी


1.तब्सिरा - आलोचना

 

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बेचैनियाँ समेटकर सारे जहान की,
जब कुछ न बन सका तो मेरा दिल बना दिया।

 

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