शेर-ओ-शायरी

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मैं परीशाँ था, परीशाँ हूँ, नई बात नहीं,
आज वो भी है परीशान, खुदा खैर करे।

-उमर अंसारी

 

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अंधेरे माँगने आये थे रौशनी की भीख,
हम अपना घर न जलाते तो क्या करते?

 

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अपना दर्दे-दिल समझने की यहाँ फुर्सत किसे,
हम तो औरों का तड़पना देखकर तड़पा किये।

-आनन्द नारायण 'मुल्ला'

 

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अपनी फिक्र न कुछ करें प्रभू-प्रेम के दास,
सुई नंगी खुद रहे, सबके सिये लिबास।

 

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