शेर-ओ-शायरी

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उम्मीदे सुलह क्या हो किसी हकपरस्त से,
पीछे वो क्या हटेगा जो हद से बढ़ा न हो।
-यगाना चंगेजी


1. हकपरस्त -
सत्यनिष्ट, सत्य का पुजारी, धर्मात्मा
 

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एक दिल में गम जमाने भर का
क्यों  भर दिया,
खू-ए-हमदर्दी ने कूजे मे समन्दर भर दिया।

1.खू - स्वभाव, आदत, फितरत 2. कूजा - मिट्टी का सकोरा

 

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करूँ मैं दुश्मनी किससे कोई दुश्मन भी हो अपना,
मुहब्ब्त ने नहीं दिल में जगह छोड़ी अदावत की।

1.अदावत - दुश्मनी, शत्रुता

 

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कसरते-गम में लुत्फे-गमख्वारी, सागरे-मय का काम देती है,
वक्त पर इक लफ्जे-हमदर्दी, इब्ने-मरियम का काम देता है।
-अब्दुल हमीद 'अदम'

1.कसरत - प्राचुर्य, बाहुल्य, अधिकता 2. लुत्फ - (i)आनन्द, मजा (ii) करूणा, तरस (iii) दया, रहम, अनुकम्पा, मेहरबानी
3.सागरे-मय - शराब का याला 4.गमख्वारी – हमदर्दी
5.इब्ने-मरियम - मरियम का पुत्र हजरत ईसा, ईसा मसीह जो ईसाई धर्म के संस्थापक थे और जो फूंक से मुर्दों को जिला देते थे।

 

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