शेर-ओ-शायरी

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कितने कांटों की बददुआ ली है,
चन्द कलियों की जिन्दगी के लिए।

 

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कितने हसीन लोग थे जो मिलकर एक बार,
आंखों में जज्ब हो गये, दिल में समा गये।
-अब्दुल हमीद 'अदम'


1.जज्ब - (i) आत्मसात, एक में समाया हुआ (ii) आकर्षण, कशिश

 

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किसी का रंज देखूँ यह नहीं होता मेरे दिल से,
नजर सैयाद कि झपके तो कुछ कह दूँ अनादिल से।

1.सैयाद - बहेलिया, चि
ड़ीमार, आखेटक, शिकारी

2. अनादिल - अंदलीब का बहुवचन, बुलबुले

 

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किसी के काम न आए तो आदमी क्या है,
जो अपनी ही फिक्र में गुजरे वह जिन्दगी क्या है?
-'असर' लखनवी
 

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