शेर-ओ-शायरी

  इन्तिजार  (Wait)   Next >>

आंखों ने जरे-जर्रे पर सिज्दे लुटाये हैं,
क्या जाने, जा छुपा मेरा पर्दानशीं कहाँ।

-अख्तर शीरानी

 

1.पर्दानशीं - पर्दे में रहने वाली

 

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आने में सदा देर लगाते ही रहे तुम,
जाते रहे हम जान से आते ही रहे तुम।

-रासिख अजीमाबादी

 

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इक मैं कि इन्तिजार में घड़ियाँ गिना करूँ,
इक तुम कि मुझसे आंख चुराकर चले गये।

-जोश मल्सियानी

 

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इन्तिजारे-फस्ले-गुल में खो चुके आंखों के नूर
और बहारे-बाग लेती ही नहीं आने का नाम।


1.फस्ले-गुल - बहार का मौसम, वसन्त ऋतु

 

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