शेर-ओ-शायरी

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मुद्दतों से मेरे गुलशन का यही अहवाल है,
बिजलियाँ गिरती रहीं और आशियाँ बनते रहे।


1.अहवाल -
हाल 2. आशियाँ - घोसला, नीड़
 

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मुश्किलों ने खुद फराहम की है आसानी मुझे,
पत्थरों ने भी दिया है वक्त पर पानी मुझे।


1.फराहम -
एकत्र, इकट्ठा, एक जगह
 

*****

 

मेरी हस्ती शौके-पैहम मेरी फितरत इज्तिराब,
कोई मंजिल हो मगर गुजरा चला जाता हूँ मैं।

-'जिगर' मुरादाबादी


1.पैहम - निरंतर, लगातार

2. इज्तिराब - व्याकुलता, बेचैनी, बेताबी, आतुरता

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मैं अकेले ही चला या जानिबे-मंजिल मगर,
लोग साथ आते गए, और कारवां बनता गया।


1. जानिबे-मंजिल - मंजिल की ओर

 

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