शेर-ओ-शायरी

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रहे-तलब में कहाँ इम्तियजे -दैरो-हरम,
जहाँ किसी ने सदा दी, वहीं पयाम किया।


-रविश सिद्दकी
 

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रास्ता रोकने वालों तुम्हें मालूम नहीं,
तुमने पैगाम दिया है मुझे चलने के लिए।


1.पैगाम - संदेश, पयाम, संदेशा

 

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रूकती नहीं किसी के लिये मौजे-जिन्दगी,
धारे से जो हटे, वो किनारे पर आ गये।

-आनन्द नारायण मुल्ला

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ले चल हाँ मझधार में ले चल, साहिल साहिल क्या जानूं,
मेरी कुछ परवाह न कर, मैं खूगर हूँ तूफानों का।

-हफीज जालंधरी


1.मझ
धार - नदी के बीचोबीच 2. साहिल – किनारा, तट

3. खूगर - आदी
 

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