शेर-ओ-शायरी

<< Previous  जुस्तजू  (Quest) Next>>

वह मेरी जौलाँगाह नहीं वह मेरा फर्शे-ख्वाब नहीं,
जिस दरिया में तूफान नहीं, जिन मौजों में गिर्दाब नहीं।

-सागर


1.जौलाँगाह - दौड़ने का मैदान, सैर का स्थान

2. फर्शे-ख्वाब - सोने का बिछौना 3. गिर्दाब - भंवर, जलावर्त
 

*****


संवारना है अगर तुमको गुलशने-हस्ती
तो पहले कांटों में उलझाओ जिन्दगानी को।

 

*****

 

सकूँ है मौत यहाँ जौके-जुस्तजू के लिये,
यह तिश्नगी वह नहीं है जो बुझाई जाती है।

-'जिगर' मुरादाबादी


1.जौके-जुस्तजू - तलाश की चाहत या शौक

 2. तिश्नगी - प्यास, पिपासा, तृष्णा
 

*****


सब बाँध चुके कब के, सरे-शाख निशेमन,
एक हम हैं कि गुलशन की हवा देख रहे हैं।

-जलील मानिकपुरी

 

1., सरे-शाख-डाली पर 2.निशेमन-घोंसला,नीड़,कुलाय

 

*****

 

<< Previous    page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17  Next >>