शेर-ओ-शायरी

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किसी की जुस्तजू में इक मुकाम ऐसा भी आता है,
जहाँ मंजिल तो क्या अपना निशाँ ऐ दिल नहीं मिलता।

-दिल शाहजहाँपुरी


1.जुस्तजू - तलाश

 

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कुछ लोग हैं कि वक्त के सांचे में ढल गये,
कुछ लोग हैं कि वक्त के सांचे बदल गये।

-मख्मूर सइदी

 

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खा-खा के शिकस्त फतह पाना सीखो
गिरदाब में कहकहा लगाना सीखो,
इसे दौरे –तलातुम में अगर जीना है
खुद अपने को तूफान बनाना सीखो।

-नजीर बनारसी


1.शिकस्त - पराजय, पराभव, हार
2. फतह - विजय, जीत, कामयाबी, सफलता
3. गिरदाब - भंवर, जलावर्त 4. दौरे–तलातुम - तूफानी दौर

 

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खाते रहे फरेब, संभलते रहे कदम,
चलते रहे जुनूं का सहारा लिये हुए।

-'शारक' मेरठी


1. जुनूं - उन्माद, पागलपन

 

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