शेर-ओ-शायरी

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जब खाक ही होना था मुझको तो खाके-रहे-सहरा होता,
इक कोशिशे-पैहम तो होती, उड़ता होता, गिरता होता।

-जमील मजहरी


1.खाक - (i) धूल, रंज, गर्द (ii) मिट्टी जमीन

2.खाके-रहे-सहरा - मरूस्थल या रेगिस्तान के रास्ते की धूल

 

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जरा दरिया की तह तक तू पहुंच जाने की हिम्मत कर,
तो फिर ऐ डूबने वाले, किनारा ही किनारा है।

-माहिर-उल-कादिरी

 

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जाओ न इस बेखबरी पै हमारे,
हर ख्वाब से इक अहद की बुनियाद पड़ी है।

-फिराक गोरखपुरी


1.ख्वाब - स्वप्न, सपना 2.अहद - युग, काल

 

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जिन्दगी कशमकशे-इश्क के आगाज का नाम,
मौत अंजाम इसी दर्द के अफसाने का।

-'अर्श' मल्सियानी


1. कशमकश - (i) खींचातानी, आपाधापी (ii) असमंजस, संकोच, दुविधा, पसोपेश (iii) संघर्ष, लड़ाई (iv) दौड़-धूप
2. आगाज - आरम्भ, शुरूआत

 

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