शेर-ओ-शायरी

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तौहीने - जिन्दगी है कनारे की जुस्तजू,
मझदार में सफीना - ए – हस्ती उतार दे।
फिर देख की उसका रंग निखरता है किस तरह
दोशीजए - खिजां को खिताबे – बहार दे।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1.जुस्तजू - तलाश, खोज 2.हस्ती - जीवन नौका
3.दोशीजा-जवान और अल्हड लड़की, कुमारी 4. दोशीजा-ए–खिजां - पतझड़ रूपी युवती
5.खिताबे – बहार - बहार का नाम या बहार की संज्ञा
 

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थपेड़े सह नहीं सकता जो अमवाजे-हवादिस का,
वह बहरे-जिन्दगानी का शनावर हो नहीं सकता।


1. अमवाजे –हवादिस - रोज-रोज की मुसीबतें
2.बहरे-जिन्दगानी - जीवन-सागर
3.शनावर - मल्लाह, केवट, नाविक, कर्णधार

 

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दिल के लिये हयात का पैगाम बन गईं,
बैचैनियाँ सिमट के तेरा नाम बन गईं।


1. हयात - जिन्दगी, जीवन
 

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दीवानगिए-शौक का आलम तो देखिए,
मंजिल से बार-बार हम आगे निकल गये।

- असर उस्मानी


1.आलम - स्थिति, हालत, दशा

 

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