शेर-ओ-शायरी

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निगाहे-शौक को शाखे-निहाले-गुल की तलाश,
हवाए-तुन्द की यह जिद कि आशियाँ न बने।


1.निगाहे-शौक - अभिलाशा, उत्कंठा या ख्वाहिश
की निगाह 2.शाखे-निहाले-गुल -फलों से सजी हुई डाली

3.हवाए-तुन्द - तेज हवा
 

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फरागत से दुनिया दम भर न बैठो,
अगर चाहते हो फरागत जियादा।

-ख्वाजा हाली


1.फरागत - (i) फुर्सत, अवकाश, छुट्टी

(ii) सुख, आराम, इत्मीनान (iii) मुक्ति, नजात

 

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बना लूँगा ऐसे हजार आशियाँ मैं,
अगर शोलाजन आशियाँ है तो क्या गम।

-'निहाल' सेहरारवी


1.शोलाजन - जलता हुआ, जिसमें आग लग गई हो, लपटों पर
 

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बाज आ साहिल पै गोते खाने वाले बाज आ,
डूब मरने का मजा दरिया-ए-बेसाहिल में है।

-यगाना चंगेजी


1.साहिल - किनारा, तट

2. दरिया-ए-बेसाहिल - दरिया जिसका किनारा न हो

 

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