शेर-ओ-शायरी

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कहा था सबने, डूबेगी यह कश्ती,
मगर हम जानकर बैठे उसी में।

-खलीक बीकानेरी

 

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किश्ती को तूफान से बचाना तो सहज है,
तूफान के वकार का दिल टूट जायेगा।

-नरेश कुमार 'शाद'


1.वकार - प्रतिष्ठा, इज्जत

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खेलना जब उनको तूफानों से आता ही न था,
फिर वो कश्ती के हमारे, नाखुदा क्यों हो गये।

-'अफसर' मेरठी


1. नाखुदा - मल्लाह, नाविक, केवट, कर्णधार

 

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खोला है किसने अपने सफीने का बादबां,
तूफां सिमट गये हैं कनारों की गोद में।


1. सफीना - नाव, नौका, कश्ती

2.बादबां - पोतपट, मरूतपट, जहाज में
लगाया जाने वाला पर्दा, जिसमें हवा भरने से जहाज चलता है।

 

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