शेर-ओ-शायरी

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जब कश्ती साबितो-सालिम थी,

साहिल की तमन्ना किसको थी,
अब ऐसी शिकस्ता कश्ती पर,

साहिल की तमन्ना कौन करे।
-मुइन अहसन 'जज्बी'


1. साबितो-सालिम - ठीकठाक 2. साहिल - किनारा, तट

 3. शिकस्ता - टूटी हुई

 

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जरा थमे जो यह तूफां तो हो कुछ अन्दाजा,
कहाँ हूँ मैं कहाँ कश्ती, कहाँ किनारा है।

 

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तूफाँ बड़े गरूर से ललकारता रहा,
कश्ती बड़ी नियाज से जिद पर अड़ी रही।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1. नियाज - निष्ठा

 

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तूफाँ से खेलना अगर इन्सान सीख ले,
मौजों से आप उभरें, किनारे नये-नये।

-'असर' लखनवी
 

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