शेर-ओ-शायरी

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भरोसा है खुदी पर, नाखुदा की इल्तिजा कैसी,
मेरी कश्ती ही साहिल है, मेरी कश्ती में साहिल है।

-दाग
1.खुदी - स्वयं 2. नाखुदा - मल्लाह, नाविक, कर्णधार

 3. इल्तिजा - प्रार्थना, दरखास्त 4. साहिल - किनारा, तट

 

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मझधार में जब कश्ती पहूँची, कश्ती वालों पै क्या गुजरी,
यह तूफानों की बातें हैं, आसूदा-ए-साहिल क्या जाने।

-जगन्नाथ आजाद


1. आसूदा-ए-साहिल - किनारे पर रहकर संतोष करने वाले

 

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मरने की दुआएं  क्यों माँगू जीने की तमन्ना कौन करे,
ये दुनिया या वो दुनिया अब ख्वाहिशे-दुनिया कौन करे?
जब कश्ती साबितो-सालिम थी, साहिल की तमन्ना किसको थी,
अब ऐसी शिकस्ता कश्ती पर, साहिल की तमन्ना कौन करें?

-मुईन अहसन जज्बी


1.साबितो-सालिम - ठीकठाक, सही हालत में

 2.साहिल - किनारा, तट 3.शिकस्ता - टूटी हुई

 

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मैंने यूं कश्ती का रूख सू-ए-तूफां कर दिया,
साजगारे-दिल हवा-ए-दामने-साहिल न था।

-'अलम' मुजफ्फरनगरी


1.सू-ए-तूफां - तूफान की ओर 2. साजगारे-दिल - दिल के मुआफिक या अनुकूल, जो बात दिल को पसंद आ जाए
3. हवा-ए-दामने-साहिल - साहिल के आँचल की हवा

 

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यूँ ही डूबोता रहा किश्तियाँ अगर सैलाब,
तो सतहे-आब पै चलना भी आ ही जायेगा।


1. सैलाब - बाढ़ 2. सतहे-आब - पानी की सतह

 

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