शेर-ओ-शायरी

खुदगर्ज़ी (Self-centredness) Next >>

अब इससे क्या गरज कि रहबर खुदगरज निकला,
पराई आस जो तकते है, अक्सर ख्वार होते हैं।

-जोश मल्सियानी


1.रहबर-रास्ता दिखाने वाला, पथप्रदर्शक 2.खुदगरज-केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करने वाला,स्वार्थी, खुदमत्लब, स्वार्थपर

3ख्वार-अपमानित, तिरस्कृत, जलील

 

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अभी इनसे क्या अर्जे - मतलब करें,
अभी चार दिन की मुलाकात है।

-अब्दुल हमीद अदम
 

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आज आलम में है सन्नाटा तो है मेरी तलाश,
कल इसी दुनिया को शिकायत थी मेरी फरियाद से।


1.आलम - संसार, दुनिया 2.फरियाद- सहायता के लिए पुकार, दुहाई, शिकायत, आर्तनाद, दुख की आवाज

 

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'इकबाल' कोई महरम अपना नहीं जहां में,
मालूम क्या किसी को दर्दे – निहाँ हमारा।

-मोहम्मद इकबाल


1.महरम - मित्र, दोस्त, राजदार 2.दर्दे–निहाँ- छुपा हुआ दर्द

 

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